Thursday, February 2, 2023
Home Essay त्योहारों का महत्व पर निबंध | Essay on Importance of Festivals in...

त्योहारों का महत्व पर निबंध | Essay on Importance of Festivals in Hindi

Rate this post

1. सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना के प्रतीक :

त्यौहार सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना के प्रतीक हैं। जन-जीवन में जागृति लाने वाले और उसके शृंगार हैं। समष्टिगत जीवन में जाति की आशा-आकांक्षा के चिह्न हैं, उत्साह एवं उमंगों के प्रदाता हैं। राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के द्योतक हैं।
जीवन की एकरसता से ऊबे समाज के लिए त्यौहार वर्ष की गति के पड़ाव हैं। वे भिन्न-भिन्न प्रकार के मनोरंजन, उल्लास और आनन्द प्रदान कर जीवन चक्र को सरस बनाते हैं।

पर्व युगों से चली आ रही सांस्कृतिक परम्पराओं, प्रथाओं, मान्यताओं, विश्वासों, आदर्शों, नैतिक, धार्मिक तथा सामाजिक मूल्यों का वह मूर्त प्रतिबिम्ब हैं जो जन-जन के किसी एक वर्ग अथवा स्तर विशेष की झाँकी ही प्रस्तुत नहीं करते, अपितु असंख्य जनता की अदम्य जिजीविषा और जीवन के प्रति उत्साह का साक्षात् एवं अन्तःस्पर्शी आत्म-दर्शन भी कराते हैं।

2. सामाजिक संस्कृति की आत्मा :

त्यौहार सामाजिक संस्कृति की आत्मा को अभिव्यक्ति देते हैं तो सामाजिक सामूहिकता का बोध कराते हैं और अगर विद्वेषकारी मतभेद कहीं हैं तो उनके विस्मरण की प्रतीति कराते हैं। इसीलिए त्यौहारों की व्यवस्था समाज कल्याण और सुख-समृद्धि उत्पादों के रूप में हुई थी। भारतीय समाज में ज्ञान का प्रसार करने के लिए श्रावण की पूर्णिमा को श्रावणी उपाकर्म के रूप में ज्ञान की साधना का पर्व मनाया गया। समाज में शौर्य की परम्परा बनाये रखने और भीतरी तथा बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए शक्ति अनिवार्य है।

अतः शक्ति-साधना के लिए विजयदशमी पर्व को मनाने की व्यवस्था हुई। समाज को सुख और समृद्धि की ओर ले जाने के लिए सम्पदा की जरूरत होती है। उसके लिए दीपावली को लक्ष्मी पूजन का पर्व शुरू हुआ। विविध पुरुषार्थों को साधते समय समाज में एक या दूसरी तरह की विपमता उत्पन्न हो जाती है। इस विषमता की भावना को लुप्त करने के लिए और सभी प्रकार का मनोमालिन्य मिटाने के लिए तथा स्नेह-भाव की वृद्धि के लिए ‘होली’ पर्व की प्रतिष्ठा हुई।

3. प्राकृतिक सुंदरता और सजीवता :

जब-जब प्रकृतिसुन्दरी ने सोलह शृंगार सजा कर अपना रूप निखारा, रंग-बिरंगे फूलों की चूनर ओढ़ी, खेत-खलिहानों की हरीतिमा से अपना आवरण रंगा या चाँद-तारों की बिन्दिया सजाई, माँग में बाल अरुण की लालिमा रूपी सिन्दूर भरा, इन्द्रधनुष की भाँहे तान, काली घटा का अंजन आँजा और विराट् को लुभाने चली तब-तब धरती मुग्ध हो झुम उठी, धरती पुत्र कृत-कृत्य हो मदमस्त हुआ। वह मस्ती में नाचने-गाने लगा। प्रकृति का बदलता सौन्दर्य मानव-मन में उमड़ती उमंग और उल्लास के रूप में प्रकट होकर पर्व या त्यौहार कहलाया ।

प्रकृति की सजीवता से मानव उल्लसित हो उठा। प्रकृति ने संगिनी बनकर उसे सहारा दिया और मखी बनकर जीवन प्रसन्न मानव ने धरती में बीज डाला। वर्षा ने उसे सींचा, सूर्य की गर्मी ने उसे पकाया। जल और सूर्य मानव के आराध्य बन गए। श्रम के पुरस्कार में जब खेती लहलहाई तो मानव का हृदय खिल उठा, उसके चरण थिरक उठे, वाणी मुखर हो गई। संगीत-स्त्रोत फूट पड़े। वाणी ने उस आराध्य की वन्दना की, जिसने उसे सहारा दिया था। सभ्यता के विकास में मन की उमंग और प्रभु के प्रति आभार प्रकट करने के लिए अभ्यर्थना और नृत्य संगीत ही उसका माध्यम बने। यह वही परम्परा तो हैं, जो त्यौहारों के रूप में आज भी मुखरित है, जीवन्त है।

4. पारिवारिक और कर्त्तव्यबोध के संदेशवाहक :

त्यौहारों का महत्त्व पारिवारिक बांध की जागृति में है, अपनत्व के विराट् रूप-दर्शन में है। होली तथा दीपावली पर परिवार जनों को तथा दीपावली पर इष्ट मित्रों को भी बधाई पत्र ( ग्रीटिंग कार्ड) तथा मिष्टान्न आदि भेजना अपनत्व की पहचान ही तो है।
त्यौहार कर्तव्यबोध के संदेशवाहक के नाते भी महत्त्वपूर्ण हैं। राखी ने भाई को बहिन की रक्षा का संदेश दिया। होली नं ‘वैर भाव भूलने’ के संदेश को दोहराया। दशहरे ने आततायी के विनाश के प्रति कर्तव्य का बोध कराया। दीपावली ने ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ का संदेश दिया।

5. राष्ट्रीय एकता के उद्बोधक :

त्यौहार राष्ट्रीय एकता के उद्बोधक हैं. राष्ट्र की एकात्मता के परिचायक हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक विस्तृत इस पुण्यभूमि भारत का जन- जन जब होली, दशहरा और दीपावली मनाता है, होली का हुड़दंग मचाता है, दशहरा के दिन रावण को जलाता है और दीपावली की दीप-पंक्तियों से घर, आँगन, द्वार को ज्योतित करता है, तब भारत की जनता राजनीति-निर्मित्त उत्तर और दक्षिण का अन्तर समाप्त कर एक सांस्कृतिक गंगा – धारा में डुबकी लगाकर एकता का परिचय दे रही होती हैं।

‘दक्षिण का ओणम्. उत्तर का दशहरा, पूर्व की (दुर्गा) पूजा और पश्चिम का महारास, जिस समय एक-दूसरे से गले मिलते हैं, तब भारतीय ती अलग, परदेशियों तक के हृदय- शतदल एक ही झोंके में खिल खिल जाते हैं। इसमें अगर कहीं से वैसाखी के भंगड़े का स्वर मिल जाए या राजस्थान की पनिहारी की रौनक घुल जाए तो कहना ही क्या ? भीलों का भगेरिया और गुजरात का गरबा अपने आप में लाख-लाख इन्द्रधनुषों की अल्हड़ता के साथ होड़ लेने की क्षमता रखते हैं।
कवि इकबाल की जिज्ञासा, ‘कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी’ का समाधान हमारे पर्व और त्यौहारों में ही है। सत्ययुग से चली आती त्यौहार–परम्परा, द्वापर और त्रेता युग को पार कर कलियुग में भी भारतीय संस्कृति और सभ्यता की ध्वजा फहरा रही है।

‘प्रत्येक आने वाले युग ने बीते युग को अपनाया और त्यौहारों की माला में गूँथकर रख दिया। इस माला के फूल कभी सूखे नहीं, क्योंकि हर आने वाली पीढ़ी ने न सिर्फ उन फूलों . को सहेज कर रखा, वरन् उनमें नए फूलों की वृद्धि भी की। और ये त्यौहार भारतीय संस्कृति और सभ्यता के दर्पण बन गए।’

RELATED ARTICLES

रामधारी सिंह दिनकर पर निबंध | Essay on Ramdhari singh dinkar

कवि परिचय - दिनकर जी का जन्म १६०८ में सेमरिया जिला मुंगेर (बिहार) में हुआ। आप पटना विश्वविद्यालय के सम्माननीय स्नातक...

शिक्षित बेरोजगारी की समस्या निबंध | Problem of Educated Unemployment Essay in Hindi

शिक्षित बेरोजगारी की समस्या भारत के लिए एकदम अपरिचित वस्तु नहीं, इति-- हास के पृष्ठों से हमें पता चलता है कि...

भारत में बेरोजगारी की समस्या पर निबंध (Essay on the Problem of Unemployment in India)

प्रायः बेरोजगारी की समस्या का आरोप सामान्यतया शिक्षित मध्यम - श्रेणी की वेरोजगारी को सामने रख कर किया जाता है ।...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

शुभमन गिल खिलाड़ी की जीवनी | Biography of Shubman Gill in Hindi

क्रिकेटर शुभमन गिल का जीवन परिचय | Shubman Gill Biography in hindi: शुभमन गिल का जन्म 8 सितंबर...

रामधारी सिंह दिनकर पर निबंध | Essay on Ramdhari singh dinkar

कवि परिचय - दिनकर जी का जन्म १६०८ में सेमरिया जिला मुंगेर (बिहार) में हुआ। आप पटना विश्वविद्यालय के सम्माननीय स्नातक...

अनमोल वचन स्वामी विवेकानंद के विचार | Swami Vivekananda Thoughts in Hindi

"स्वामी विवेकानंद के दर्शन को समझना" स्वामी विवेकानंद एक प्रसिद्ध भारतीय व्यक्ति थे जिन्होंने समाज पर स्थायी प्रभाव छोड़ा।...

त्योहारों का महत्व पर निबंध | Essay on Importance of Festivals in Hindi

1. सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना के प्रतीक : त्यौहार सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना के प्रतीक हैं। जन-जीवन में...