बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का जीवन परिचय | Baba Saheb Bhimrao Ambedkar Biography in Hindi

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Baba Saheb Bhimrao Ambedkar Biography[birth, Personal and Social Life, Education] in Hindi | भारत रत्न डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर की जीवनी और उनसे जुड़े कुछ अनछुए पहलु

भारत का संविधान दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले में सबसे बड़ा संविधान है. भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था. अंग्रेजों से आजाद होने के 3 साल बाद भारत के संविधान का निर्माण हुआ था. जिसमें बहुत से स्वतंत्र देशों के धाराओं और संविधान के नियमों को लिया गया और एक बहुत बड़ा संविधान तैयार हुआ.

बिंदु(Points)जानकारी (Information)
नाम(Name)बाबा साहेब आंबेडकर
पूरा नाम(Full Name)भीमराव रामजी आंबेडकर
जन्म तारीख (Date of Birth)14 अप्रैल 1891
जन्म स्थान (Birth Place)महू, मध्यप्रदेश
अवार्ड(Award)भारत रत्न (1990)
पत्नी का नाम (Wife Name)रमाबाई, सविता आंबेडकर
धर्मं (Religion)बौद्ध
नागरिकता (Nationality)भारतीय
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बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जन्म और परिवार(Baba Saheb Bhimrao Ambedkar Birth and Family)

बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का पूरा नाम भीमराव रामजी आंबेडकर था. जो की आगे जाकर बाबा साहेब के नाम से विख्यात हुए. बाबा साहेब का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू, मध्यप्रदेश में हुआ था. इनके पिताजी का नाम रामजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई सकपाल था. ये एक बहुत बड़े अर्थशास्त्री थे और राजनेता भी थे. जिन्होंने दलित बौद्ध आन्दोलन को प्रेरित किया और दलितों के प्रति सामजिक भेदभाव के खिलाफ प्रचार किया और उसी के साथ- साथ उन्होंने महिलाओं के मजदूरी के हक के लिए महिलाओं का समर्थन किया. वे आजाद भारत के पहले कानून मंत्री थे. वे भारत के संविधान के प्रमुख वास्तुकार और भारत के गणराज्य के संस्थापक पिता (संविधान को बनाने वाले कहलाये) थे.

पारिवारिक जीवन (Baba Saheb Bhimrao Ambedkar Personal Life)

बाबा साहेब ने दो विवाह किये थे. पहला विवाह उन्होंने रमाबाई से किया था. वर्ष 1935 में अज्ञात बीमारी होने के कारण उनकी मृत्यु हो गयी थी. वर्ष 1940 के दशक के अंत में उन्होंने भारत के संविधान लेखन के कार्य को पूरा करने के बाद वे अनिद्रा के कारण परेशान रहते थे. उनके पैरो में भी दर्द रहता था. फिर उन्होंने इन्सुलिन और होमियोपथिक दवाईया लेना शुरू कर दी थी. एक समय मुंबई में इलाज के लिए गए थे. वहाँ उनकी मुलाकात डॉ शारदा कबीर से हुई. जिनके साथ उन्होंने आगे चलकर विवाह भी रचाया. शादी के बाद शारदा कबीर ने अपना नाम बदलकर सविता आंबेडकर रख लिया. लोग उन्हें प्यार से माई और माई साहेब भी कहा करते थे.

माई साहेब का स्वर्गवास 29 मई 2003 को नई दिल्ली में हुआ. उस समय उनकी उम्र 93 साल थी.

शिक्षा(BabaSaheb Bhimrao Ambedkar Education)

आंबेडकर की शिक्षा कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में हुई जहाँ पर उन्होंने अर्थशास्त्र में डिग्री पाई. कानून, अर्थशास्त्र और राजनीति में अपने शोध के लिए एक विद्वान के रूप में प्रतिष्ठा पाई.

प्रारंभिक जीवन अपने शुरुआती करियर में वे एक अर्थशास्त्री प्रोफेसर और वकील भी थे उसके बाद की ज़िन्दगी उनके राजनीतिक कार्यो के लिए जानी जाती है. वे भारत की आज़ादी की लड़ाई बातचीत और आज़ादी के प्रचार के लिए स्वतन्त्रता सेनानियों के साथ जुड़ गए. उन्ही के साथ-साथ उन्होंने कई पत्रिकाओं का प्रकाशन किया. दलितों के राजनीतिक अधिकारों के लिए लड़ें और दलितों के सामाजिक अधिकारों के लिए वकालत भी की. भारत की आज़ादी और संविधान के लिए बाबा साहेब का योगदान बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.

सामाजिक कार्य (Bhimrao Ambedkar Social Work)

बाबा साहेब आंबेडकर एक समाज सुधारक थे. जिन्होंने समाज के बंधुओ को सुधारने और रहने का तरीका बताया. वे भारत के निराश वर्ग के नेता के रूप में प्रतिष्ठित हुए. इस तरह उन्हें सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और राजनीतिक अक्षमताओ को दूर करने व कमजोर स्थिति से उनके उत्थान के लिए कड़ी मेहनत की. उनके अनुसार भारतीय समाज एक लोकतांत्रिक समाज था. जहाँ लोगों को कक्षाओं और जातियों में विभाजित किया गया था.

सन 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार “भारत रत्न” दिया गया. बाबा साहेब की याद में भारतीय संस्कृति में कई स्मारक और चित्रण शामिल है.

आंबेडकर की जाति(Bhimrao Ambedkar Caste)

भीमराव अम्बेडकर जी का जन्म महार जाति में हुआ था. यह जाति महाराष्ट्र और इसके आस-पास के इलाकों में निवास करती हैं. भारत में कहीं-कहीं महार जाति, क्षत्रिय जाति से भी ताल्लुक रखती है. हिंदू जातियों में इसका स्थान दलित जाति का था.महाराष्ट्र की जनसंख्या का 10% महार लोक का है. महार जाति के ज्यादातर लोगों ने बौद्ध धर्मं अपना लिया हैं. श्री आर. वी. रसेल के अनुसार महाराष्ट्र का नाम महारों के कारण ही महाराष्ट्र यानि महारों का राष्ट्र (महार राष्ट्र) पड़ा.

बाबा साहेब की मृत्यु (Bhimrao Ambedkar Death)

साल 1948 में भीमराव आंबेडकर को डाईबिटिज़ जैसी लाइलाज बिमारी ने जकड लिया जो कि आगे चलकर उनकी मृत्यु का कारण बनी. आंबेडकर की मृत्यु वर्ष 6 दिसम्बर 1956 में नई दिल्ली में हुई थी.

बाबा साहेब की उपलब्धियाँ (Bhimrao Ambedkar Achievement)

बाबासाहेब आंबेडकर ने जो भारत के लिए किया उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता हैं. दलितों के उत्थान के लिए गए उनके कार्यों के लिए आज भी उन्हें याद किया जाता हैं.

आंबेडकर का पुस्तकालय(Bhimrao Ambedkar Liberary)

बाबा साहेब के राजगढ़ वाले निजी पुस्तकालय में 50000 से भी अधिक किताबें थी और यह दुनिया का सबसे बड़ा निजी पुस्तकालय था. डॉ आंबेडकर को 9 भाषाओं हिंदी, पाली, संस्कृत, अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, मराठी, फारसी और गुजराती का ज्ञान था.

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